लोक प्रशासन की प्रकृति (Nature of Public Administration)
Public Administration की प्रकृति को समझने के लिए उसे किसी एक शब्द—”science”, “art”, “management” या “politics”—में सीमित करना उचित नहीं है। इसकी प्रकृति बहुआयामी है।
लोक प्रशासन एक सामाजिक विज्ञान है
Public Administration को सामान्यतः Social Science का हिस्सा माना जाता है क्योंकि इसका अध्ययन मानव व्यवहार, संस्थाओं, संगठन, सत्ता, निर्णय और सामाजिक संबंधों से संबंधित है।
प्राकृतिक विज्ञानों की तरह प्रशासन में प्रयोगशाला-आधारित सार्वभौमिक नियम स्थापित करना कठिन है। एक प्रशासनिक सिद्धांत जो एक देश में सफल हो सकता है, वह दूसरे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संदर्भ में उसी प्रकार सफल हो, यह आवश्यक नहीं है।
इसी कारण comparative और ecological approaches का महत्व बढ़ा। प्रशासन को उसके सामाजिक वातावरण, राजनीतिक संस्कृति, आर्थिक संरचना और ऐतिहासिक परिस्थितियों से अलग करके नहीं समझा जा सकता।
लोक प्रशासन विज्ञान है या कला?
यह Public Administration की सबसे पुरानी बहसों में से एक है। यदि “विज्ञान” से आशय व्यवस्थित ज्ञान, अवधारणाओं, अनुभवजन्य अध्ययन और कारण-परिणाम संबंधों की खोज से है, तो Public Administration में वैज्ञानिक तत्व स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। संगठनात्मक व्यवहार, decision-making, budgeting, personnel management और policy implementation का व्यवस्थित अध्ययन किया जा सकता है।
लेकिन प्रशासन केवल नियमों का mechanically application नहीं है। एक District Magistrate, Police Officer या Municipal Administrator को अनेक ऐसी परिस्थितियों में निर्णय लेना पड़ सकता है जहाँ कोई निश्चित formula उपलब्ध नहीं होता। वहाँ judgment, leadership, communication, negotiation और परिस्थिति की समझ की आवश्यकता होती है। इस अर्थ में Public Administration में art का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
इसलिए अधिक संतुलित निष्कर्ष यह है कि Public Administration science and art दोनों के तत्वों वाला applied social science है।
लोक प्रशासन राजनीति से अलग है या राजनीति का हिस्सा?
Wilson और Goodnow की परंपरा में administration और politics के बीच distinction स्थापित करने का प्रयास हुआ। इसका उद्देश्य प्रशासन को partisan interference से बचाना और professional competence को बढ़ाना था।
लेकिन आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में कठोर dichotomy को स्वीकार करना कठिन है। प्रशासनिक अधिकारी नीति को केवल लागू नहीं करते, बल्कि उसके implementation में अनेक discretionary decisions लेते हैं। किसी कानून को लागू करने के लिए बनाए गए rules, priorities, resource allocation और implementation strategy स्वयं policy consequences उत्पन्न कर सकते हैं।
इसलिए आधुनिक दृष्टिकोण में राजनीति और प्रशासन को पूर्णतः अलग-अलग compartments के रूप में देखने की बजाय interdependent relationship के रूप में समझना अधिक उचित है। Oxford Research Encyclopedia में Wilson की परंपरा की contemporary interpretation भी इसी बात की ओर संकेत करती है कि politics और administration को पूर्णतः अलग करने की बजाय उनके बीच complementarity को समझना चाहिए।
लोक प्रशासन सार्वजनिक है, इसलिए निजी प्रशासन से अलग है
Public Administration और Private Administration दोनों में planning, organization, personnel, finance और management जैसे सामान्य तत्व मिल सकते हैं। इसी कारण कुछ classical thinkers ने प्रशासन के सामान्य principles खोजने का प्रयास किया।
लेकिन दोनों में मूलभूत अंतर उनके purpose and accountability में है। Private organization का प्राथमिक उद्देश्य सामान्यतः संगठन के निर्धारित निजी लक्ष्यों, जैसे profitability या organizational survival, से जुड़ा होता है। Public Administration को इसके विपरीत public interest, constitutional values, legality, equality, accountability और social justice जैसे मूल्यों को ध्यान में रखना पड़ता है।
एक निजी कंपनी यदि किसी लाभहीन सेवा को बंद कर देती है तो यह व्यावसायिक दृष्टि से उचित हो सकता है। लेकिन सरकार किसी दूरदराज क्षेत्र में विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र या सड़क केवल इसलिए बंद नहीं कर सकती कि उसका financial return कम है। सार्वजनिक प्रशासन में efficiency के साथ equity और public interest भी महत्वपूर्ण हैं।
यही अंतर बाद में New Public Management की आलोचनाओं में महत्वपूर्ण बना, क्योंकि NPM ने private-sector management techniques को public sector में लागू करने पर बल दिया, लेकिन इससे efficiency और equity के बीच tension पैदा होने की संभावना बनी रही। Christopher Hood ने 1991 में NPM के doctrinal content और उसकी आलोचनाओं का व्यवस्थित विश्लेषण किया।
लोक प्रशासन एक राजनीतिक प्रक्रिया भी है
Classical Public Administration में administrator को अक्सर neutral implementer के रूप में देखा गया। लेकिन आधुनिक Public Administration ने इस धारणा को चुनौती दी। प्रशासनिक अधिकारी को यह तय करना पड़ सकता है कि सीमित संसाधनों में किस क्षेत्र को प्राथमिकता मिले, कौन-सी योजना पहले लागू हो, किस समूह को सहायता मिले और किसी policy की अस्पष्टता को किस प्रकार interpret किया जाए।
इसलिए प्रशासनिक निर्णयों में values, interests and choices प्रवेश कर सकते हैं। यही कारण है कि Dwight Waldo ने प्रशासन को केवल efficiency का technical science मानने के विरुद्ध तर्क दिया। उनकी 1948 की पुस्तक The Administrative State ने public administration को लोकतंत्र, राजनीतिक मूल्यों और administrative power से जोड़कर देखा।
लोक प्रशासन मूल्य-आधारित (Value-Laden) है
एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या प्रशासन केवल efficiency से संचालित होना चाहिए? Classical administrative theory का एक बड़ा हिस्सा efficiency पर बल देता था। लेकिन democratic administration में efficiency अकेला मूल्य नहीं हो सकता।
मान लीजिए सरकार दो योजनाओं में से एक को चुनती है। पहली योजना कम लागत में अधिक लोगों को लाभ देती है, लेकिन अत्यंत वंचित वर्ग तक नहीं पहुँचती। दूसरी योजना महँगी है, लेकिन historically disadvantaged population को आवश्यक सुविधा देती है। यहाँ केवल “सबसे कम लागत” वाला विकल्प चुनना पर्याप्त नहीं होगा। Administration को equity, justice, responsiveness और public interest जैसे मूल्यों पर भी विचार करना होगा। इस प्रकार आधुनिक Public Administration को केवल value-free managerial activity मानना कठिन है।
लोक प्रशासन का बौद्धिक विकास
Public Administration का विकास एक सीधी रेखा में नहीं हुआ। इसमें अलग-अलग intellectual phases आए और प्रत्येक phase ने पूर्ववर्ती दृष्टिकोण की सीमाओं को चुनौती दी।
Classical Phase
प्रारंभिक Public Administration ने organization, hierarchy, specialization, efficiency और administrative principles पर जोर दिया।
Woodrow Wilson ने administrative study की नींव रखने का प्रयास किया। Frederick W. Taylor के Scientific Management ने efficiency और work methods को वैज्ञानिक ढंग से समझने का प्रयास किया। Henri Fayol ने administrative functions और management principles पर बल दिया। Luther Gulick और Lyndall Urwick ने organization तथा administrative principles को व्यवस्थित करने का प्रयास किया।
Gulick के साथ जुड़ा प्रसिद्ध POSDCORB प्रशासनिक कार्यों को समझने का एक महत्वपूर्ण classical formulation है—Planning, Organizing, Staffing, Directing, Coordinating, Reporting और Budgeting।
लेकिन classical approach की समस्या यह थी कि उसने अनेक बार administrative principles को लगभग universal laws की तरह प्रस्तुत किया।
Herbert Simon और “Proverbs of Administration”
यहीं Herbert A. Simon का योगदान निर्णायक हो जाता है। Simon ने 1946 के अपने प्रसिद्ध लेख The Proverbs of Administration में classical administrative principles की वैज्ञानिकता पर प्रश्न उठाया। उनका तर्क था कि अनेक प्रशासनिक principles ऐसे हैं जिन्हें परस्पर विरोधी सिद्धांतों के रूप में भी प्रस्तुत किया जा सकता है। इसलिए केवल “principles” की सूची administrative science का पर्याप्त आधार नहीं बन सकती। Simon ने Public Administration के केंद्र में decision-making को रखा।
उनके लिए प्रशासन को समझने का अर्थ है यह समझना कि संगठन के भीतर व्यक्ति किस प्रकार निर्णय लेते हैं। वास्तविक जीवन में decision-maker के पास पूर्ण information नहीं होती, सभी alternatives ज्ञात नहीं होते और भविष्य के परिणामों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इस स्थिति को Simon की प्रसिद्ध धारणा bounded rationality से समझा जाता है। व्यक्ति पूर्णतः rational नहीं होता; उसकी rationality information, time, cognitive capacity और organizational constraints से सीमित होती है।
यह Public Administration की प्रकृति को एक महत्वपूर्ण दिशा देता है—Administration is fundamentally a process of decision-making.
Traditional से Behavioural Administration तक
Simon के बाद Public Administration अधिक empirical और behavioural दिशा में आगे बढ़ा। प्रशासनिक संस्थाओं को केवल formal structure के रूप में देखने के बजाय वास्तविक administrative behaviour का अध्ययन किया जाने लगा। यहाँ प्रश्न बदल गया। Classical approach पूछता था कि संगठन को कैसे बनाया जाना चाहिए? और Behavioural approach पूछता है कि संगठन के भीतर वास्तविक मनुष्य कैसे व्यवहार करते हैं और निर्णय कैसे लेते हैं? यह परिवर्तन Public Administration को psychology, sociology, economics और organizational behaviour से जोड़ता है।
Dwight Waldo और Administrative State
Waldo ने Public Administration में values और democracy के महत्व को पुनः स्थापित किया। उनकी 1948 की The Administrative State ने यह प्रश्न उठाया कि क्या administration को केवल efficiency के आधार पर समझा जा सकता है। लोकतांत्रिक राज्य में administration को constitutionalism, accountability, democratic values और public interest के साथ भी जोड़ा जाना चाहिए।
इस दृष्टिकोण ने Public Administration को एक purely technical discipline मानने के बजाय political and normative discipline के रूप में समझने की दिशा मजबूत की।
New Public Administration
1960 के दशक के अंत तक यह अनुभव होने लगा कि traditional Public Administration का efficiency और neutrality पर अत्यधिक जोर सामाजिक असमानता और justice के प्रश्नों का पर्याप्त उत्तर नहीं देता। 1968 का Minnowbrook movement इस परिवर्तन से जुड़ा महत्वपूर्ण चरण था। New Public Administration ने social equity, relevance, change, responsiveness और citizen-oriented administration पर जोर दिया।
इस दृष्टिकोण का केंद्रीय प्रश्न था कि प्रशासन कुशल तो है, लेकिन किसके लिए कुशल है? यदि प्रशासन अत्यंत efficient है लेकिन समाज के कमजोर वर्गों तक न्यायपूर्ण ढंग से नहीं पहुँचता, तो केवल efficiency को administrative success मानना उचित नहीं होगा। इसने Public Administration के normative dimension को मजबूत किया।
New Public Management
1980 और 1990 के दशक में एक अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन आया जिसे New Public Management (NPM) कहा गया। NPM ने traditional bureaucracy की आलोचना करते हुए private-sector management, performance measurement, managerial autonomy, competition, contracting-out और customer orientation जैसे विचारों को public sector में लागू करने पर बल दिया।
Christopher Hood के 1991 के प्रसिद्ध लेख A Public Management for All Seasons? ने NPM के प्रमुख doctrines तथा उनकी आलोचनाओं का प्रभावशाली विश्लेषण किया।
NPM ने Public Administration को इस प्रश्न की ओर मोड़ा कि सरकारी संगठन बेहतर performance कैसे दे सकते हैं? लेकिन इसकी आलोचना भी हुई। यदि नागरिक को केवल “customer” के रूप में देखा जाए तो citizenship, collective interest और democratic accountability जैसे पहलू कमजोर पड़ सकते हैं।
New Public Service
Robert B. Denhardt और Janet V. Denhardt ने New Public Service के माध्यम से NPM के market-oriented दृष्टिकोण का लोकतांत्रिक विकल्प प्रस्तुत किया। उनका जोर इस बात पर था कि public servants को नागरिकों को केवल customers के रूप में नहीं देखना चाहिए। Public service का उद्देश्य citizens को empower करना, public interest को आगे बढ़ाना और democratic citizenship को मजबूत करना है।
इस दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण विचार है कि “Serve rather than steer।” अर्थात् public administrator का कार्य केवल समाज को ऊपर से निर्देशित करना नहीं, बल्कि नागरिकों, समुदायों और संस्थाओं के साथ मिलकर सार्वजनिक हित की प्राप्ति करना है। इससे Public Administration का विकास government → management → governance → citizen engagement की ओर जाता दिखाई देता है।
शासन (Governance) और लोक प्रशासन
समकालीन Public Administration में Governance की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। Traditional Public Administration में सरकार को मुख्य actor माना जाता था। Governance perspective में public problem solving के लिए government के साथ civil society, private sector, community organizations और citizens की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि government अप्रासंगिक हो गई है। बल्कि government की भूमिका कई क्षेत्रों में commanding authority से बढ़कर coordinator, facilitator और network manager की हो सकती है। इस परिवर्तन ने Public Administration के scope को और विस्तृत किया है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, लोक प्रशासन की प्रकृति को केवल विज्ञान, कला, प्रबंधन या राजनीति में से किसी एक के रूप में समझना उचित नहीं होगा। यह इन सभी के महत्वपूर्ण तत्वों को समाहित करने वाला एक बहुआयामी सामाजिक एवं व्यावहारिक अनुशासन है। इसमें विज्ञान की तरह व्यवस्थित ज्ञान और अध्ययन की आवश्यकता होती है, कला की तरह व्यावहारिक विवेक, नेतृत्व और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता आवश्यक होती है तथा प्रबंधन की तरह संगठन, समन्वय और संसाधनों के कुशल उपयोग पर बल दिया जाता है। साथ ही, चूँकि लोक प्रशासन सार्वजनिक नीतियों और राजनीतिक उद्देश्यों को व्यवहार में लागू करता है, इसलिए इसका राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी गहरा संबंध है। आधुनिक दृष्टिकोण में लोक प्रशासन का उद्देश्य केवल प्रशासनिक दक्षता प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनहित, सामाजिक न्याय, समानता, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता सुनिश्चित करना भी है। इसलिए लोक प्रशासन को सबसे उपयुक्त रूप से ऐसे अनुशासन और प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है जो राज्य की नीतियों और उद्देश्यों को प्रशासनिक क्षमता के माध्यम से वास्तविक सार्वजनिक परिणामों में परिवर्तित करती है।

