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नवीन लोक प्रशासन का विकास (Evolution of New Public Administration)

नवीन लोक प्रशासन का विकास और सामाजिक समता की अवधारणा को दर्शाता शैक्षिक चित्र

नवीन लोक प्रशासन का विकास (Evolution of New Public Administration)

परिचय एवं अर्थ

नवीन लोक प्रशासन (New Public Administration—NPA) लोक प्रशासन का एक ऐसा दृष्टिकोण है, जो प्रशासनिक दक्षता के साथ सामाजिक समानता (Social Equity), सामाजिक न्याय, नागरिक सहभागिता और प्रशासनिक उत्तरदायित्व पर बल देता है। परंपरागत लोक प्रशासन में संगठन, नियम, पदानुक्रम, मितव्ययिता और कार्यकुशलता को प्रमुख महत्त्व दिया जाता था। NPA ने प्रश्न उठाया कि क्या प्रशासन की सफलता केवल कम लागत में अधिक कार्य करने से तय होनी चाहिए, या यह भी देखना चाहिए कि सरकारी सेवाओं का लाभ किन लोगों को मिल रहा है। NPA के अनुसार प्रशासन का उद्देश्य केवल सरकारी नीतियों को लागू करना नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं को दूर करने और वंचित वर्गों तक सार्वजनिक सेवाएँ पहुँचाने में योगदान देना भी है। यह दक्षता का विरोध नहीं करता, बल्कि उसे सामाजिक न्याय के साथ जोड़ता है।

नवीन लोक प्रशासन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1 परंपरागत लोक प्रशासन: दक्षता और नियमबद्धता

1887 में वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) ने अपने निबंध The Study of Administration में प्रशासन के व्यवस्थित अध्ययन और कार्यकुशलता पर बल दिया। राजनीति-प्रशासन द्वैत (Politics-Administration Dichotomy) की धारणा ने राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक क्रियान्वयन के बीच अंतर स्थापित करने का प्रयास किया। इसके बाद फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर (F. W. Taylor) के वैज्ञानिक प्रबंधन, मैक्स वेबर (Max Weber) के नौकरशाही मॉडल और लूथर गुलिक (Luther Gulick) के POSDCORB ने प्रशासनिक दक्षता, कार्य-विभाजन, पदानुक्रम और संगठनात्मक नियंत्रण को महत्त्व दिया। इन विचारों ने प्रशासन को व्यवस्थित बनाने में योगदान दिया, लेकिन आलोचकों के अनुसार सामाजिक न्याय, मानवीय आवश्यकताओं और प्रशासनिक निर्णयों के मूल्यगत पक्ष पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया।

2 व्यवहारवादी दृष्टिकोण और हर्बर्ट साइमन

बीसवीं शताब्दी के मध्य में व्यवहारवादी दृष्टिकोण (Behavioural Approach) ने प्रशासन के वास्तविक व्यवहार और निर्णय-निर्माण के वैज्ञानिक अध्ययन पर बल दिया। हर्बर्ट साइमन (Herbert A. Simon) ने अपनी पुस्तक Administrative Behavior (1947) में प्रशासनिक निर्णय-निर्माण का विश्लेषण किया। उन्होंने पारंपरिक प्रशासनिक सिद्धांतों की सार्वभौमिकता पर प्रश्न उठाया और वास्तविक निर्णय-प्रक्रियाओं के अध्ययन को महत्त्व दिया। व्यवहारवादी दृष्टिकोण ने प्रशासनिक अध्ययन को अधिक विश्लेषणात्मक बनाया। फिर भी, प्रशासन वास्तव में कैसे काम करता है, इस प्रश्न के साथ यह प्रश्न भी महत्त्वपूर्ण था कि प्रशासन को किन मूल्यों और सामाजिक उद्देश्यों के अनुसार काम करना चाहिए। इस बहस ने NPA के विकास की बौद्धिक पृष्ठभूमि तैयार की।

3 1960 का दशक: सामाजिक परिवर्तन

1960 के दशक में अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement), नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष, गरीबी, शहरी समस्याओं और वियतनाम युद्ध को लेकर असंतोष बढ़ा। इन परिस्थितियों ने सरकारी संस्थाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर प्रश्न उठाए। यह स्पष्ट हुआ कि सभी नागरिकों पर समान नियम लागू करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के कारण सरकारी सेवाओं तक उनकी पहुँच अलग-अलग हो सकती है। इस कारण प्रशासनिक दक्षता के साथ सामाजिक समानता और प्रासंगिकता (Relevance) पर बल दिया जाने लगा।

नवीन लोक प्रशासन का विकास: प्रमुख घटनाएँ और तिथियाँ

  • 1948 – ड्वाइट वाल्डो (Dwight Waldo) – The Administrative State में प्रशासन के राजनीतिक और मूल्यगत आधारों का विश्लेषण।
  • 1968 – प्रथम मिनोब्रुक सम्मेलन (Minnowbrook I) – NPA के विकास का प्रमुख पड़ाव। प्रशासन की सामाजिक प्रासंगिकता, मूल्यों और परिवर्तन पर बल।
  • 1971 – फ्रैंक मारिनी (Frank Marini) – संपादित पुस्तक Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective का प्रकाशन।
  • 1980 – जॉर्ज फ्रेडरिकसन (H. George Frederickson) – New Public Administration के माध्यम से सामाजिक समानता और NPA के विचारों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया।
  • 1988 – मिनोब्रुक II – बदलती प्रशासनिक परिस्थितियों में लोक प्रशासन के सिद्धांतों और भविष्य पर पुनर्विचार।
  • 2008 – मिनोब्रुक III – समकालीन प्रशासनिक चुनौतियों, वैश्वीकरण और सामाजिक समानता पर विमर्श।
  • 2018 – मिनोब्रुक IV – मिनोब्रुक परंपरा के 50 वर्ष पूरे होने पर लोक प्रशासन की दिशा और सामाजिक समानता पर चर्चा।

1 प्रथम मिनोब्रुक सम्मेलन, 1968

प्रथम मिनोब्रुक सम्मेलन सितंबर 1968 में अमेरिका में Syracuse University के Maxwell School से संबंधित परंपरा के अंतर्गत आयोजित हुआ। इसमें लोक प्रशासन के विद्वानों ने प्रशासनिक शिक्षा, शोध और व्यवहार की सामाजिक प्रासंगिकता पर विचार किया। ड्वाइट वाल्डो इस सम्मेलन की पहल से प्रमुख रूप से जुड़े थे। सम्मेलन का उद्देश्य प्रशासन को केवल तकनीकी दक्षता और संगठनात्मक नियमों तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक समस्याओं, प्रशासनिक मूल्यों और नागरिकों की आवश्यकताओं से जोड़ना था। इसी कारण इसे NPA के विकास का निर्णायक पड़ाव माना जाता है।

2 फ्रैंक मारिनी का योगदान, 1971

फ्रैंक मारिनी ने 1971 में Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective का संपादन किया। इस पुस्तक ने मिनोब्रुक सम्मेलन से संबंधित विचारों को व्यवस्थित अकादमिक रूप दिया और NPA को व्यापक पहचान दिलाई। मारिनी का प्रमुख योगदान इन विचारों को एक साझा विमर्श में प्रस्तुत करना था। इसलिए उन्हें पुस्तक का संपादक कहना अधिक सटीक है, न कि NPA के प्रत्येक सिद्धांत का अकेला प्रवर्तक।

3 जॉर्ज फ्रेडरिकसन का योगदान

जॉर्ज फ्रेडरिकसन NPA के प्रमुख सिद्धांतकारों में से हैं। उन्होंने सामाजिक समानता को प्रशासनिक सफलता का महत्त्वपूर्ण मानदंड बनाया। उनकी पुस्तक New Public Administration (1980) NPA के अध्ययन में प्रमुख संदर्भ है। उनके दृष्टिकोण के अनुसार प्रशासन का मूल्यांकन केवल अर्थव्यवस्था (Economy), दक्षता (Efficiency) और प्रभावशीलता (Effectiveness) के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक समानता (Social Equity) के आधार पर भी होना चाहिए।
उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएँ पहले से पर्याप्त हैं और दूसरे क्षेत्र में डॉक्टरों की भारी कमी है, तो दोनों को समान संसाधन देना आवश्यक नहीं कि न्यायसंगत परिणाम दे। वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर संसाधनों का वितरण सामाजिक समानता को बेहतर ढंग से बढ़ावा दे सकता है।

4 मिनोब्रुक II, III और IV

1988, 2008 और 2018 में आयोजित मिनोब्रुक सम्मेलनों ने बदलते सामाजिक और प्रशासनिक परिवेश में लोक प्रशासन की दिशा पर पुनर्विचार किया। इन सम्मेलनों में सामाजिक समानता, प्रशासनिक सुधार और समकालीन शासन की चुनौतियाँ महत्त्वपूर्ण विषय रहे। इनका महत्त्व यह है कि NPA के विचार केवल 1960 के दशक तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बाद के प्रशासनिक विमर्श में भी उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा होती रही।

नवीन लोक प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ

1 सामाजिक समानता (Social Equity)

सामाजिक समानता NPA की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है। इसका अर्थ है कि प्रशासनिक नीतियों और सार्वजनिक सेवाओं का मूल्यांकन इस आधार पर भी किया जाए कि उनका लाभ विभिन्न सामाजिक समूहों तक किस सीमा तक पहुँच रहा है। समानता (Equality) में समान व्यवहार या समान अवसर पर बल हो सकता है, जबकि समता (Equity) में लोगों की अलग-अलग आवश्यकताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर न्यायसंगत परिणाम प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

2 प्रासंगिकता (Relevance)

प्रशासनिक अध्ययन और शोध वास्तविक सामाजिक समस्याओं से जुड़े होने चाहिए। गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और भेदभाव जैसी समस्याओं को समझना तथा उनके समाधान में प्रशासन की भूमिका का अध्ययन करना इस विशेषता के अंतर्गत आता है।

3 मूल्य-आधारित प्रशासन (Value-oriented Administration)

NPA के अनुसार प्रशासनिक निर्णय पूरी तरह मूल्य-निरपेक्ष नहीं होते। बजट, सेवाओं और संसाधनों के वितरण में सार्वजनिक हित, न्याय तथा प्राथमिकताओं से जुड़े निर्णय लेने पड़ते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि अधिकारी अपनी निजी राजनीतिक विचारधारा थोपें। उन्हें संविधान, कानून और सार्वजनिक हित के अनुरूप निर्णय लेने चाहिए।

4 परिवर्तन-उन्मुख प्रशासन (Change-oriented Administration)

प्रशासन का कार्य केवल मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना नहीं है। उसे सामाजिक समस्याओं की पहचान करके आवश्यक सुधारों में योगदान देना चाहिए। उदाहरण के लिए, सरकारी सेवाओं में अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना और वंचित नागरिकों के लिए सेवा-प्राप्ति को सरल बनाना इस दृष्टिकोण के अनुरूप है।

5 नागरिक-केंद्रित प्रशासन (Citizen-oriented Administration)

नागरिकों को केवल सरकारी सेवाओं के प्राप्तकर्ता के रूप में नहीं देखना चाहिए। उनकी आवश्यकताओं, अनुभवों और शिकायतों को प्रशासनिक निर्णयों में महत्त्व मिलना चाहिए। सार्वजनिक सुनवाई, शिकायत निवारण और नागरिक सहभागिता इसके व्यावहारिक उदाहरण हैं।

6 लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व (Democratic Accountability)

प्रशासनिक अधिकारियों को कानून, निर्वाचित सरकार और नागरिकों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। दक्षता के नाम पर पारदर्शिता, नागरिक अधिकारों और वैधानिक प्रक्रियाओं की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

परंपरागत लोक प्रशासन और NPA में अंतर

परंपरागत लोक प्रशासन

  • प्रमुख उद्देश्य – दक्षता और मितव्ययिता
  • दृष्टिकोण – संगठनात्मक एवं प्रबंधकीय
  • सामाजिक एवं मूल्य-आधारित
  • प्रमुख चिंता – नियम, पदानुक्रम और कार्यकुशलता
  • प्रशासन की भूमिका – नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन
  • सफलता का मूल्यांकन – लागत, उत्पादकता और दक्षता

नवीन लोक प्रशासन

  • प्रमुख उद्देश्य – दक्षता के साथ सामाजिक समानता
  • दृष्टिकोण – सामाजिक एवं मूल्य-आधारित
  • प्रमुख चिंता – न्याय, प्रासंगिकता और नागरिक हित
  • प्रशासन की भूमिका – क्रियान्वयन के साथ सामाजिक समस्याओं के प्रति उत्तरदायित्व
  • सफलता का मूल्यांकन – दक्षता, प्रभावशीलता और सामाजिक समानता

यह अंतर तुलनात्मक है। NPA दक्षता और नियमों को अस्वीकार नहीं करता, बल्कि प्रशासनिक सफलता के मूल्यांकन में सामाजिक न्याय को भी शामिल करता है।

NPA और New Public Management (NPM) में अंतर

NPA और NPM दो अलग प्रशासनिक दृष्टिकोण हैं। दोनों प्रशासनिक सुधार से संबंधित हैं, लेकिन उनकी प्रमुख प्राथमिकताएँ अलग हैं।

NPA

  • विकास का प्रमुख दौर – 1960 के दशक के अंत में उभार
  • मुख्य चिंता – सामाजिक समानता और प्रशासनिक मूल्य
  • नागरिक की भूमिका – लोकतांत्रिक नागरिक और सार्वजनिक सेवाओं का लाभार्थी
  • प्रमुख संदर्भ – मिनोब्रुक सम्मेलन, जॉर्ज फ्रेडरिकसन

NPM

  • विकास का प्रमुख दौर – विशेष रूप से 1980 के दशक से प्रभावशाली
  • मुख्य चिंता – प्रदर्शन, परिणाम और प्रबंधकीय दक्षता
  • नागरिक की भूमिका – कई मॉडलों में सेवा-उपभोक्ता पर बल
  • प्रमुख संदर्भ – क्रिस्टोफर हुड (Christopher Hood) और प्रबंधकीय सुधार

याद रखें: NPA का केंद्रीय विचार Social Equity है, जबकि NPM की पहचान प्रदर्शन-आधारित प्रबंधन, परिणामों और प्रबंधकीय दक्षता पर बल से होती है। यह अंतर दोनों दृष्टिकोणों की प्रमुख प्रवृत्तियों को दर्शाता है; दोनों के भीतर विविध विचार मौजूद हैं।

भारतीय लोक प्रशासन में NPA की प्रासंगिकता

NPA का विकास अमेरिका में हुआ, लेकिन इसके विचार भारतीय प्रशासन को समझने में भी उपयोगी हैं। भारत में सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के कारण सभी नागरिकों को सरकारी सेवाओं का समान लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए प्रशासनिक दक्षता के साथ सेवा-वितरण में न्याय और समावेशन भी महत्त्वपूर्ण हैं।

संवैधानिक समानता:

संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण से संबंधित है। अनुच्छेद 15 भेदभाव के निषेध तथा निर्दिष्ट परिस्थितियों में विशेष प्रावधानों से, जबकि अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता से संबंधित है। ये प्रावधान प्रशासन के लिए समानता और न्याय के महत्त्वपूर्ण मानदंड प्रस्तुत करते हैं।

कल्याणकारी योजनाएँ:

शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास की योजनाओं की सफलता केवल बजट खर्च करने से नहीं मापी जा सकती। यह भी देखना चाहिए कि लाभ वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक पहुँचा या नहीं और सेवा प्राप्त करने में उन्हें किन बाधाओं का सामना करना पड़ा।

स्थानीय शासन:

73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने क्रमशः पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं को संवैधानिक आधार दिया। स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान, नागरिक सहभागिता और जवाबदेही NPA की भावना से संबंधित हैं।

डिजिटल प्रशासन:

ऑनलाइन सेवाएँ प्रशासन को तेज और पारदर्शी बना सकती हैं, लेकिन डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी कुछ नागरिकों के लिए बाधा बन सकती है। NPA की दृष्टि से प्रशासनिक सुधार का मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि सेवाएँ सभी वर्गों के लिए कितनी सुलभ हैं।

नवीन लोक प्रशासन की आलोचना

1 सामाजिक समानता को मापने की कठिनाई

दक्षता को लागत और समय जैसे संकेतकों से मापा जा सकता है, लेकिन सामाजिक समानता का आकलन अधिक जटिल है। अलग-अलग समूहों की आवश्यकताएँ अलग होती हैं। इसलिए यह निर्धारित करना कठिन हो सकता है कि संसाधनों का वितरण किस सीमा तक न्यायसंगत है।

2 प्रशासनिक निष्पक्षता की समस्या

NPA प्रशासन से सामाजिक समस्याओं के प्रति सक्रिय होने की अपेक्षा करता है। लेकिन यदि अधिकारी अपने निजी राजनीतिक विचारों को सार्वजनिक हित का मानक बना लें, तो निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसका समाधान संवैधानिक मूल्यों, कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के माध्यम से किया जाना चाहिए।

3 सिद्धांत और व्यवहार के बीच अंतर

सामाजिक न्याय के उद्देश्य तभी प्राप्त हो सकते हैं जब पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित कर्मचारी, संस्थागत क्षमता और राजनीतिक समर्थन उपलब्ध हों। केवल सामाजिक समानता का आदर्श स्वीकार करने से प्रशासनिक परिणाम अपने-आप नहीं बदलते।

4 दक्षता की उपेक्षा की आशंका

NPA पर यह आलोचना की जाती है कि सामाजिक समानता और मूल्यों पर अधिक बल देने से दक्षता का महत्त्व कम हो सकता है। लेकिन इसकी संतुलित व्याख्या दक्षता का विरोध नहीं करती। प्रभावी प्रशासन के लिए दक्षता और सामाजिक समानता दोनों आवश्यक हैं।

5 एकीकृत सिद्धांत का अभाव

NPA सामाजिक समानता, प्रासंगिकता, नागरिक सहभागिता और परिवर्तन जैसे अनेक विचारों को समाहित करता है। इसलिए इसे एक पूर्णतः एकीकृत सिद्धांत के बजाय व्यापक बौद्धिक आंदोलन या दृष्टिकोण के रूप में समझना अधिक उचित है।

निष्कर्ष

नवीन लोक प्रशासन का विकास परंपरागत प्रशासनिक चिंतन में सामाजिक मूल्यों और नागरिक हितों को अधिक महत्त्व देने की प्रक्रिया का परिणाम था। 1968 का मिनोब्रुक सम्मेलन इसका प्रमुख पड़ाव बना। ड्वाइट वाल्डो ने प्रशासन के राजनीतिक एवं मूल्यगत आधारों पर बल दिया, फ्रैंक मारिनी ने मिनोब्रुक विमर्श को अकादमिक स्वरूप देने में योगदान दिया और जॉर्ज फ्रेडरिकसन ने सामाजिक समानता को NPA की केंद्रीय पहचान के रूप में विकसित किया। NPA का मुख्य योगदान यह है कि इसने प्रशासनिक सफलता को केवल दक्षता और मितव्ययिता से नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से भी जोड़ा। इसकी सीमाओं के बावजूद यह दृष्टिकोण आज भी उपयोगी है, क्योंकि लोकतांत्रिक प्रशासन को कुशल होने के साथ-साथ न्यायसंगत और नागरिक-केंद्रित भी होना चाहिए।

पुस्तकें

  • Waldo, Dwight — The Administrative State: A Study of the Political Theory of American Public Administration (1948).
  • Marini, Frank (ed.) — Toward a New Public Administration: The Minnowbrook Perspective (1971).
  • Frederickson, H. George — New Public Administration (1980).
  • Simon, Herbert A. — Administrative Behavior (1947).
  • Wilson, Woodrow — “The Study of Administration” (1887).

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लोक प्रशासन की प्रकृति

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